बुधवार, 7 अगस्त 2024

जुर्म

 लॉ कॉलेज के प्रांगण में

विद्यार्थी चर्चा कर रहे थे

कभी इस तो कभी उस धारा पर

कहर बरपा कर रहे थे

एक माली बड़ी देर से उन्हें देख रहा था

गंभीरता से कुछ सोच रहा था

अंत में वह हिचकता हुआ आया

अपना नाम बद्री सिंह पांडे बताया

माथा अंगोछे से पोंछा

धीरे से पूछा

ऐसे कौन-से दो जुर्म हैं जिनकी धारा नहीं है

अदालत में जिनके लिए सज़ा नहीं है

पर समाज जिनकी भरपूर सज़ा देता है

वह जुर्म जो ईश्वर की दया से होता है

लड़कों में सन्नाटा छा गया

ऐसा बेढब प्रश्न कहाँ से आ गया

फिर धीरे से एक लड़की बोली

पहला जुर्म मैं हूँ

और दूसरा मेरे पिता हैं

इस देश में लड़की होना या उसका बाप होना

दोनों गुनाह के समान हैं

दोनों अपमान झेलते हैं पर मुँह नहीं खोलते हैं

उनका मुँह तो तभी खुलता है

जब अंतिम बुलावा आता है

या सब्र का बाँध टूट जाता है

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